Monday, October 8, 2012

समाचार के प्रस्तुतीकरण में संयमित भाषा जरूरी



लखनऊ 06 अक्टूबर, 2012। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश की उत्कृष्ट केन्द्र योजना के अन्तर्गत आज दो दिवसीय इलेक्ट्रानिक मीडिया प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के ए0पी0 सेन सभागार में हुआ।
कार्यशाला के अध्यक्ष माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रो0 रामजी त्रिपाठी ने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया एक विशेष धारा है जिसमें अनन्त संभावनाएं हैं। इसमें कार्य करने के लिए जुनून की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक चैनलों पर जो कार्यक्रम दिखाये जाते हैं उन कार्यक्रमों को परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता है यह दुखद है। इसमें किसी प्रकार की आचार संहिता नहीं है जिससे इन पर अंकुश लगाना मुश्किल है लेकिन अपनी सोच से फूहड़ कार्यक्रमों को रोका जा सकता है। आज बड़े व्यावसायी या राजनेता चैनल तो स्थापित कर ले रहे हैं परन्तु वह चैनल को चलाने हेतु अपनी संस्कृति को छोड़कर नकारात्मक कार्यक्रमों को प्रसारित कर रहे हैं ताकि उनका चैनल प्रतिस्पर्धा में आगे हो। प्रो0 त्रिपाठी ने कहा कि आज सकारात्मक समाचारों की बाढ़ सी है लेकिन समाचार चैनलों द्वारा हत्या, डकैती, अपहरण तथा बलात्कार आदि खबरों को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज अच्छे मीडिया विशेषज्ञों की आवश्यकता है जो समाचार चैनलों को सही दिशा दे सके।
दिल्ली से आये मीडिया विशेषज्ञ श्री मुकेश कुमार ने कहा कि मीडिया जगत में कार्य करने वाले 90 प्रतिशत मीडिया कर्मी भाषा में पारंगत नहीं हैं। श्री कुमार ने कहा कि यह दुखद है कि हम जन्म लेते ही जिस भाषा में बोलना शुरू करते हैं उसी भाषा पर सही लिखने और पढ़ने का अधिकार नहीं रख पाते हैं। उच्चारणों पर ध्यान देना होगा तभी शब्दों का सही अर्थ स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के चैनल अब सस्ते में कार्य करने वाले लोगों को मौका दे रही है जिससे समाचारों की गुणवत्ता में निरन्तर गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि आप भावी पत्रकार हैं आपको बहुत बड़े संवर्ग को सम्बोधित करना है। अतः आप समाज के समक्ष सही तथ्यों को लाना होगा।
विशिष्ट अतिथि दूरदर्शन केन्द्र लखनऊ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डाॅ0 सतीश ग्रोवर ने बताया कि मीडिया के क्षेत्र में कार्य करने के लिए पहले अपने आप को पहचानकर उन गुणों को विकसित करने की आवश्यकता होगी। अपने आपको भीड़ से अलग कर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि इसमें एक पहचान मिल सके। यह एक विशिष्ट क्षेत्र है जिसमें पैसे से ज्यादा कार्य का महत्व है इसलिए इसमें विशिष्ट लोगों के आने की आवश्यकता है। मीडिया के  क्षेत्र में कार्य करने हेतु अभ्यास की जरूरत है इसलिए प्रतिदिन सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि न्यू मीडिया के आने से समाचार तो जरूर मिल रहा है लेकिन यह समुचित ज्ञान नहीं दे पा रहा है जिससे समाचरों के प्रस्तुतिकरण में व्यापक बदलाव आया है। समाचारों को लिखने मंे संयमित भाषा का प्रयोग करना होगा।
हिन्दी तथा पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो0 सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया का लेखन इतना प्रभावशाली होना चाहिए जिससे दर्शकों/श्रोताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके। उन्होंने कहा कि समाचारों में सांस्कृतिक चेतना और आर्थिक पक्षों को इस तरह उजगार करना चाहिए जिससे समाज लाभान्वित हो सके। समाचारों को प्रस्तुत करते समय स्थानीय भाषा का प्रयोग करना चाहिए इससे दर्शकों व श्रोताओं में आत्मीयता का बोध हो सके। उन्होंने कहा कि एक अच्छे पत्रकार में मीडिया की समस्त विधाओं का समावेश होना चाहिए। उसके अंदर प्रस्तुतिकरण की भी क्षमता होनी चाहिए ताकि वह समाचारों में गंभीरता ला सके। उन्होंने कहा कि मीडिया में चयन उन्हीं लोगों का होता है जिसके अंदर कार्य करने की क्षमता होती है। प्रो0 दीक्षित ने कहा कि गलतियों से सीखने की आवश्यकता है घबड़ाने की नहीं।
अतिथियों का स्वागत करते हुए हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो0 कैलाश देवी सिंह ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक मीडिया का युग है जिसने पूरे विश्व को एक गांव का रूप दे दिया है। इसका असर हमारे जीवन में नकारात्मक या सकारात्मक दोनों ही रूपों में दिखाई पड़ रहा है। जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। इलेक्ट्रानिक मीडिया का जादू बच्चों, बूढ़ों और नौजवानों पर सिर चढ़कर बोल रहा है। आज टी0वी0, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि हमारे जीवन के अंग बन गये हैं। कुल मिलाकर संचार माध्यमों ने अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है।
कार्यशाला का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। संचालन डाॅ0 श्रुति और धन्यवाद ज्ञापन डाॅ0 रमेशचन्द्र त्रिपाठी द्वारा किया गया।

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