Saturday, September 15, 2012

पत्रकारिता शिक्षा समाज को रास्ता दिखाने के लिए है न कि आजीविका के लिए

लखनऊ 15 सितम्बर, 2012। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश की उत्कृष्ट केन्द्र योजना के अन्तर्गत आज दिनांक 15 सितम्बर, 2012 को दो दिवसीय ‘प्रिन्ट मीडिया प्रशिक्षण कार्यशाला’ का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के ए0पी0 सेन सभागार में किया गया।
    उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 सरला शुक्ल ने कहा कि त्याग और तपस्या का दूसरा नाम ही पत्रकारिता है। स्वतंत्रता के पूर्व से ही हिन्दी पत्रकारिता को बहुत ही संघर्ष करना पड़ा तब आज पत्रकारिता इस आधुनिक स्वरूप में है। पत्रकारिता से ही हिन्दी भाषा का स्वरूप बन और बिगड़ रहा है। आज पत्रकारिता भाषा को नया आयाम देते हुए समाज को नई दिशा दे रही है। पत्रकार का दायित्व सिर्फ सूचना संग्रह करना ही नहीं है उसके द्वारा उसे उचित और अनुचित बातों को अलग करना भी है। पहले पत्रकारिता का व्यावसाय उद्योगपतियों द्वारा किया जाता था परन्तु आज राजनीतिज्ञों द्वारा पत्रकारिता का व्यावसाय किया जा रहा है जिससे पत्रकारिता दिशाहीन हो रही है और निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं हो पा रही है। पत्रकारों को पक्षपात रहित, निर्भीक व निष्पक्ष रह कर पत्रकारिता करनी होगी तभी समाज की सच्ची सेवा हो पायेगी। पत्रकारिता समाज में जागृति लाने का कार्य करती है इसलिए पत्रकार स्वयं अध्ययन कर घटनाओं को समाज के सामने लाए ताकि समाज जागरूक हो सके।
    उन्होंने कहा कि पत्रकारिता सनसनी से नहीं होती है सनसनी तो तात्कालिक होती है जो समाचार पत्रों या समाचार चैनलों को लाभान्वित करती है परन्तु समाज पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्हांेने नये पत्रकारिता प्रशिक्षुओं से अपील की कि संवेदनशीलता अपनाईये संवेदनहीनता नहीं।
    विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो0 सत्यदेव मिश्र ने कहा कि अतिशीघ्रता में लिखा गया साहित्य ही पत्रकारिता है इसे समझने की जरूरत है। पत्रकारिता के क्षेत्र विस्तृत हैं इसलिए अपने ज्ञान को बढ़ाना होगा किसी एक विषय की जानकारी से पत्रकार नहीं बना जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में हो रहे शोधों और सूचनाओं को संग्रह करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के विषय पर आसानी से लिखा जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता बहुत जरूरी है जिस पर जनता विश्वास कर सके। प्रो0 मिश्र ने कहा कि आज भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर बहुत देर से लिखा जा रहा जबकि पत्रकार अपनी लेखनी से ऐसा जनतंत्र तैयार करें कि नई शासन व्यवस्था सर्वोत्तम हो सके।
    विशिष्ट अतिथि, अमर उजाला, लखनऊ के एशोसियेट एडीटर श्री कुमार भवेश चन्द्र ने कहा कि पत्रकारिता शिक्षा समाज को रास्ता दिखाने के लिए है न कि आजीविका के लिए। यह अन्य विषयों से भिन्न है जो रोजगार देने के साथ ही साथ देश व समाज की सेवा के लिए उपयोगी है। पत्रकारिता करने के लिए ज्ञान का चश्मा लगाकर समाज को पढ़ना होगा।
    उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि भाषा को सही तरीके से समझना होगा तभी अपनी बात को स्पष्ट तरीके से लिखा और बोला जा सकता है। श्री चन्द्र ने कहा कि आप सभी लोग डाॅक्टर और इंजीनियर की तरह ही सोशल इंजीनियर बनने जा रहे हैं ताकि समाज का पेंच कस सकें। े हर रोज पढ़ना होगा हर रोज ज्ञान प्राप्त करना होगा तभी आप अच्छे समाज का निर्माण कर पायेंगे।
    मुख्य अतिथि हिन्दुस्तान समूह, नई दिल्ली के एशोसियेट एडीटर श्री हरजिन्दर ने कहा कि आधुनिक तकनीकी के प्रवेश से आज पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है। प्रतिदिन नये परिवर्तन हो रहे हैं और इसी के कारण आज पत्रकारिता के क्षेत्र मंे नये-नये अवसर आ रहे हैं। आज समाज का स्वरूप लगातार जटिल होता जा रहा है इसलिये समाज को सूचनायें पहुंचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा कम्यूनिकेटर की आवश्यकता पड़ रही है इसलिए पत्रकारिता में अवसर की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी बदलाव के दौर से गुजरती है पहले पत्रकारिता के लिए सिर्फ मुद्रित माध्यमों का ही प्रयोग होता था परन्तु आज विभिन्न इलेक्ट्रानिक माध्यमों के प्रवेश ने पत्रकारिता को और सुलभ बना दिया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं बदलावों ने अवसर भी दिये हैं जरूरत है तो सिर्फ अवसरों के पहचान की।
    उन्होंने कहा कि नई तकनीकें कुछ डरा रही हैं पश्चिमी देशों में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का सर्कुलेशन कम हुआ है और टी0वी0, इन्टरनेट और अन्य माध्यमों का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अभी भारत में समाचार पत्रों की स्थिति सही है यहां अभी सर्कुलेशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और भविष्य में 20-25 वर्षों तक संभव भी नहीं है।
    हिन्दुस्तान के विशेष संवाददाता श्री संतोष वाल्मीकि ने बताया कि पत्रकारिता चुनौतियों वाली दूनिया है। इसमें पत्रकार समाज के सामने प्रतिदिन परीक्षा देता है क्योंकि पत्रकार प्रत्येक दिन समाज को नई सूचनायें देता है। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकारिता में सफल होना है तो अपने दिशा को निर्धारित करना होगा। बिना दिशा तय किये इस क्षेत्र में भटकाव है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण बहुत जरूरी है क्योंकि सिर्फ सर्टिफिकेट से काम नहीं चलेगा।
    हिन्दुस्तान के उप सम्पादक श्री नीरज श्रीवास्तव ने प्रशिक्षुओं को तकनीकी जानकारी दिया। उन्होंने समाचार संकलन, समाचारों के चुनाव आदि पर अपनी बात रखी।
    दैनिक जागरण की उप सम्पादक रोली खन्ना ने बताया कि समाचार पत्र में डेस्क पर राजनीतिक, सामाजिक, क्षेत्रीय समाचार, शासकीय व अन्य क्षेत्रों से संबंधित समाचारों की बहुलता होती है इसलिए डेस्क इंचार्ज के ज्ञान का क्षेत्र विस्तृत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेस्क पर कार्य करने के लिए अंग्रेजी, हिन्दी के साथ-साथ अन्य भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है।
    कार्यशाला में प्रो0 के0डी0 सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया व डा0 रमेश चन्द्र त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया। धन्यवाद ज्ञापन डा0 कृष्णा जी श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
    कार्यशाला में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षक डाॅ0 मुकुल श्रीवास्तव, महाराणा इंस्टीट्यूट आफ कम्यूनिकेशन स्टडीज के विभागाध्यक्ष डा0 इंद्रेश मिश्रा, महाराणा प्रताप एजूकेशनल ग्रुप के डायरेक्टर जनरल श्री आर0एल0एल0 दीक्षित, एमिटि विश्वविद्यालय के शिक्षक संजीव सब्बरवाल, दुर्गेश पाठक व अन्य पत्रकारिता शिक्षण संस्थानों के  शिक्षकगण उपस्थित थे।
    कार्यशाला में लखनऊ, कानपुर व अन्य जिलों के पत्रकारिता विभाग के छात्रों ने भाग लिया।

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